सांवलिया सेठ मंदिर रात में तिरंगे की रोशनी में
Posted on October 27, 2026

Sanwariya Seth Mandir Guide: Hotel, Dharamshala, Bhojanshala, Darshan Time & Kaise Pahunche

Written by : Badhaai Do
Category: Sanwariya Seth
सांवलिया सेठ मंदिर, मंडफिया — रात की रोशनी, दिन का शिखर, मंडप और बाज़ार (Badhaai Do, मई 2026)

सांवलिया सेठ — चित्तौड़गढ़ ज़िले के मंडफिया गाँव में विराजमान श्रीकृष्ण का वह रूप जिन्हें राजस्थान, मध्य प्रदेश और गुजरात के व्यापारी अपना “सेठ” यानी बिज़नेस पार्टनर मानते हैं। हर महीने की कृष्ण चतुर्दशी को मंदिर का भंडार खुलता है और करोड़ों का चढ़ावा गिना जाता है — अक्टूबर 2026 में यह ₹31 करोड़ से ऊपर था। यह गाइड उन यात्रियों के लिए है जो पहली बार या बार-बार मंडफिया जाते हैं: दर्शन का समय, कहाँ ठहरें, कहाँ खाएँ और कैसे पहुँचें।

दर्शन और आरती का समय (मंदिर ट्रस्ट के अनुसार)

  • मंगला आरती: सुबह 5:00 बजे — मंदिर के पट खुलते हैं
  • शृंगार आरती: सुबह 8:00 बजे
  • बालभोग: सुबह 11:00 बजे
  • शयन (दोपहर): 12:00 से 2:00 बजे तक पट बंद
  • उत्थापन: दोपहर 2:00 बजे
  • संध्या आरती: सूर्यास्त के बाद
  • शयन: रात 11:00 बजे — पट बंद

सामान्य दिनों में दोपहर 2 से 5 बजे के बीच सबसे कम भीड़ रहती है। चतुर्दशी (भंडार खुलने का दिन), अमावस्या और रविवार को सुबह 7 बजे से पहले पहुँचें। बदले हुए समय के लिए मंदिर ट्रस्ट की वेबसाइट srisanwaliyaji.org देखें।

सांवलिया सेठ मंदिर का शिखर और परिसर, दिन में
मुख्य मंदिर का शिखर और परिसर, दोपहर में (मई 2026)

तीन मंदिर, एक कहानी

कथा के अनुसार सन् 1840 में भादसोड़ा-बागूंड के एक ग्वाले भोलाराम गुर्जर को सपना आया कि छापर की ज़मीन में तीन मूर्तियाँ दबी हैं। खुदाई में श्रीकृष्ण की तीन मूर्तियाँ निकलीं। एक मंडफिया में स्थापित हुई (मुख्य मंदिर — सांवलिया जी धाम), दूसरी भादसोड़ा में, और तीसरी वहीं छापर-बागूंड में जहाँ वह मिली थी (प्राकट्य स्थल)। तीनों मंदिर लगभग 5 किलोमीटर के दायरे में हैं — आधे दिन में तीनों के दर्शन हो जाते हैं। मंडफिया → भादसोड़ा → प्राकट्य स्थल का क्रम सबसे सुविधाजनक है।

मंदिर के मंडप की नक्काशीदार खंभे
नक्काशीदार मंडप — यहीं से दर्शन की कतार गर्भगृह की ओर जाती है

कैसे पहुँचें

  • सड़क से: मंडफिया चित्तौड़गढ़–उदयपुर हाईवे (NH-27) पर है। चित्तौड़गढ़ से लगभग 41 किमी (1 घंटा), उदयपुर से लगभग 85 किमी (1 घंटा 45 मिनट), भीलवाड़ा से लगभग 95 किमी। चित्तौड़गढ़ और उदयपुर दोनों से रोडवेज़ और प्राइवेट बसें हाईवे पर मंडफिया मोड़ तक जाती हैं; वहाँ से मंदिर 1–2 किमी, ऑटो मिल जाते हैं।
  • रेल से: नज़दीकी बड़ा स्टेशन चित्तौड़गढ़ जंक्शन (41 किमी) — जयपुर, अजमेर, उदयपुर, इंदौर, दिल्ली से सीधी ट्रेनें। स्टेशन के बाहर मंडफिया के लिए टैक्सी ₹800–1,200 (एक तरफ़, सामान्य दिन; मेले में ज़्यादा)।
  • हवाई मार्ग से: उदयपुर (डबोक) एयरपोर्ट, लगभग 65 किमी।
  • जयपुर से: लगभग 300 किमी, NH-48/NH-27 से 5–6 घंटे। जयपुर–चित्तौड़गढ़ ट्रेन + टैक्सी आरामदायक विकल्प है।

दूरियाँ गूगल मैप्स के अनुसार, ±5 किमी। मंदिर के पास ट्रस्ट की मुफ़्त पार्किंग है; चतुर्दशी-अमावस्या पर पार्किंग हाईवे की तरफ़ 1 किमी पहले रुकवा दी जाती है।

मंदिर के बाहर पार्किंग चौक, सुबह
मंदिर के सामने का चौक और पार्किंग, सुबह के समय

कहाँ ठहरें

1. श्री सांवलिया धाम गेस्ट हाउस (मंदिर ट्रस्ट) — सबसे भरोसेमंद

प्राकट्य धाम–जन्म स्थान हाईवे पर मंदिर ट्रस्ट का अपना गेस्ट हाउस: 47 कमरे और 4 सुइट, पूरा AC, लिफ्ट, हर कमरे में TV, फोन, हीटर; फ्री पार्किंग; रिसेप्शन 24 घंटे।
किराया (ट्रस्ट की वेबसाइट, अक्टूबर 2026): AC कमरा ₹900 प्रतिदिन · लक्ज़री सुइट ₹1,800 प्रतिदिन
बुकिंग: +91 99509 46434 (कॉल/WhatsApp) · booking@srisanwaliyaji.org
किसके लिए: परिवार और बुज़ुर्ग यात्री — साफ़, सस्ता और मंदिर से जुड़ा हुआ। चतुर्दशी से 3–4 दिन पहले बुक कर लें।

2. यशोदा विहार धर्मशाला, मंडफिया

मंदिर के पास निजी धर्मशाला — 2, 3, 4, 5 और 6 बेड के कमरे और प्रीमियम रूम, लिफ्ट, पावर बैकअप, गीज़र, WiFi, CCTV, पार्किंग, 24 घंटे चेक-इन/चेक-आउट।
बुकिंग: +91 92658 75989 (कॉल/WhatsApp) · किराया फोन पर पूछें (वेबसाइट पर नहीं लिखा है)
किसके लिए: 5–6 लोगों के ग्रुप — एक ही कमरे में पूरा परिवार।

3. होटल श्री दर्शन, मंडफिया (भदेसर रोड)

मंडफिया का सबसे ज़्यादा सराहा गया निजी होटल — यात्रियों के अनुभव के अनुसार साफ़-सुथरे कमरे, मददगार स्टाफ़ और मंदिर तक पैदल दूरी इसकी खूबी है। सामान्य दिनों में ₹1,200–2,000 के आसपास (बुकिंग साइट्स पर दर बदलती रहती है — जाने से पहले पुष्टि करें)।
किसके लिए: जो धर्मशाला से एक दर्जा ऊपर आराम चाहते हैं।

4. हाईवे के रिसॉर्ट (चित्तौड़गढ़–उदयपुर रोड, रिठोला/सेनवा)

इमेजिका रिसॉर्ट, भानफोर्ट और कैसल नारेला लेक रिसॉर्ट (गोसुंडा बाँध के सामने) मंडफिया से 15–30 किमी हैं — पूल, लॉन और बड़े कमरे; किराया ₹2,500–5,000। किसके लिए: दर्शन के साथ चित्तौड़गढ़ किला और उदयपुर घूमने वाले परिवार; शादी-सगाई के बाद सेठ जी के दर्शन करने आने वाले ग्रुप।

बुकिंग टिप: कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी (भंडार दिवस), अमावस्या, जलझूलनी एकादशी (भाद्रपद शुक्ल, सितंबर में) और दीपावली के आसपास सब कुछ 10 दिन पहले भर जाता है। इन तारीख़ों पर ट्रस्ट गेस्ट हाउस सबसे पहले बुक होता है।

रात में तिरंगे की रोशनी में सांवलिया सेठ मंदिर
रात में मंदिर तिरंगे और हरी-नीली रोशनी में (मई 2026)

कहाँ खाएँ

  • श्री सांवलिया जी मंदिर भोजनशाला — मंदिर ट्रस्ट की भोजनशाला; सादा, सात्विक थाली, बहुत कम दाम में। सबसे पहले यहीं जाएँ; दोपहर 12–2 और शाम 7–9 के बीच लाइन लगती है। (समय मंदिर पर लगे बोर्ड से पुष्टि करें।)
  • श्री सांवलिया सेठ न्यू भोजनशाला — मंदिर के पास दूसरी भोजनशाला, भीड़ कम।
  • चेतन फैमिली रेस्टोरेंट (यशोदा विहार धर्मशाला के पास) — राजस्थानी और पंजाबी थाली, परिवारों के लिए बैठने की जगह।
  • द कल्चर कैफ़े एंड रेस्टोरेंट — युवाओं के लिए, चाय-नाश्ता और फास्ट फूड।
  • दाल-बाटी-चूरमा मंडफिया मोड़ के ढाबों पर — शाम को गरम मिलती है; राजस्थान आए हैं तो एक बार ज़रूर।
मंदिर भोजनशाला का हॉल
मंदिर ट्रस्ट की भोजनशाला — स्टील की मेज़ों पर एक साथ सैकड़ों भक्त
मंदिर के बाहर प्रसाद और तस्वीरों की दुकानें
मंदिर मार्ग पर प्रसाद, तस्वीर और पूजा सामग्री की दुकानें, रात में

पूरा गाँव शाकाहारी है; मंदिर क्षेत्र में शराब और मांसाहार पर रोक है।

दर्शन की कतार
सुबह के समय दर्शन की कतार (मई 2026)

किस दिन जाएँ — मासिक भंडार और बड़े मेले

  • कृष्ण चतुर्दशी (हर महीने): भंडार खुलता है, चढ़ावे की गिनती होती है, लाखों भक्त — सबसे भारी भीड़ और सबसे ज़्यादा रौनक।
  • अमावस्या: शाम को महाप्रसाद वितरण।
  • जलझूलनी एकादशी (भाद्रपद शुक्ल): साल का सबसे बड़ा मेला — सांवलिया सेठ की शोभायात्रा; 2027 में यह सितंबर में है।
  • दीपावली, जन्माष्टमी, होली: विशेष शृंगार और झाँकी।

शांति से दर्शन चाहिए तो चतुर्दशी के 3–4 दिन बाद का कोई मंगलवार–गुरुवार चुनें।

सुबह मंदिर का प्रवेश द्वार
सुबह मंदिर के प्रवेश द्वार पर भीड़

साथ क्या रखें, क्या ध्यान रखें

  • मंदिर में मोबाइल/कैमरा प्रतिबंधित है — बाहर लॉकर/क्लॉकरूम है।
  • चढ़ावे की रसीद ज़रूर लें; ट्रस्ट का काउंटर ही आधिकारिक है।
  • गर्मियों में (अप्रैल–जून) मंडफिया में 42–45 °C — सुबह 8 बजे से पहले दर्शन करें।
  • सांवलिया सेठ को “हिसाब का हिस्सा” चढ़ाने की परंपरा है — व्यापारी मुनाफ़े का तय प्रतिशत चढ़ाते हैं; इसी से यहाँ का चढ़ावा देश में सबसे ज़्यादा में से एक है।

सांवलिया सेठ के स्टेटस और शुभकामना कार्ड

दर्शन के बाद अपने नाम के साथ सांवरिया सेठ स्टेटस कार्ड बनाइए, या 100+ सांवरिया सेठ हिंदी स्टेटस में से चुनिए। आरती और दर्शन के समय का अलग पेज: सांवरिया सेठ आरती-दर्शन टाइमिंग।

अंतिम अपडेट: अक्टूबर 2026। किराये और समय मंदिर ट्रस्ट व संस्थानों की वेबसाइट से लिए गए हैं और बदल सकते हैं — यात्रा से पहले फोन पर पुष्टि करें। कोई जानकारी गलत लगे या आप मंडफिया में होटल/धर्मशाला चलाते हैं तो hello@badhaaido.com पर लिखें।

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